सिद्ध क्षेत्र – सोनागिरिजी

नाम एवं पता

श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र - सोनागिरिजी

श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र – सोनागिरिजी

पता: ग्राम – सोनागिरिजी (सिनावल)

तहसील/जिला – दतिया (म.प्र.), पिन – 475669

टेलीफोन नं. – 07522-262222

मंत्री07522.262223, 262375

सिद्ध क्षेत्र – सोनागिरिजी

क्षेत्र का महत्व एवं ऐतिहासिकता

  • परम पावन सिद्धक्षेत्र सोनागिरि को स्वर्णगिरि, श्रमणगिरि के नामों से भी जाना जाता है। पहाड़ी की तलहटी में सनावल नामक एक गाँव है, यहीं सोनागिरि पर्वत क्षेत्र का कार्यालय एवं धर्मशाला है। सोनागिरि स्टेशन से क्षेत्र तक पक्की सड़क है।सोनागिरि एक सिद्धक्षेत्र है यहाँ से नंग, अनंग कुमार सहित लगभग साढे पंाच करोड़ मुनि तपस्या करके मुक्त हो मोक्ष को पधारे है। जिसके कारण यह अत्यन्त ही पवित्र क्षेत्र माना जाता है।यौधेय देश में श्रीपुर नगर के नरेश अरिंजय और उनकी रानी विशाला के दो पुत्र थे – नंग और अनंग। दोनो कुमार रूप, बल, विद्या और गुण, बुद्धि में अद्वितीय थे। एक बार मालव देश के नरेश धनंजय के ऊपर तिलिंग देश के नरेश अमृत विजय ने आक्रमण कर दिया। नंग-अनंग कुमार ने महाराज धनंजय की ओर से युद्ध में भाग लिया तथा अपने पराक्रम एवं बाहुबल से शत्रु देश को पराजित कर तिलिंग राज को बंदी बना लिया। जब अरिष्टपुर में विजयोत्सव मनाया जा रहा था, तभी अष्टम तीर्थंकर भगवान चन्द्रप्रभ का समवसरण नगर के बाहर आया समाचार मिलते ही सभी राजा एवं प्रजागण भक्तिभाव से समवसरण में भगवान की प्रदक्षिणा कर उनके चरणों की पूजा की। फिर भगवान का हितकारी उपदेश सुन धनंजय, अमृतविजय, नंग-अनंग कुमार आदि 1500 राजाओं को वैराग्य हो गया और वे भगवान के समवसरण में ही संयम धारण करके मुनि बन गये।सुवर्णगिरि पर्वत पर ही मुनि नंग सेन, मुनि अनंग सेन आदि अनेक मुनियों को केवल ज्ञान उत्पन्न हो गया और इसी पर्वत से नंग, अनंग, चिन्तागति, पूर्णचन्द्र, अशोकसेन, श्रीदत्त, सुवर्णसेन आदि अनेक मुनियों की निर्वाण-भूमि होने के कारण यह क्षेत्र निर्वाण क्षेत्र माना जाता है।क्षेत्र दर्शन:- क्षेत्र के सदर फाटक में घुसते ही तलहटी के मंदिरो और धर्मशालाओं का क्रम प्रारंभ हो जाता है। तलहटी में कुल 17 मंदिर और 5 छतरी है। यहां कुल 15 धर्मशालायें है। इस क्षेत्र पर किसी अन्य सम्प्रदाय या धर्मवालों का किसी प्रकार का विवाद नहीं है अर्थात् यह शुद्ध दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र है। पहाड़ के ऊपर 77 मंदिर, 13 छतरियाँ और 5 क्षेत्रपाल के स्थान है इन सबकी व्यवस्था श्री दिगम्बर जैन सोनागिरि सिद्धक्षेत्र संरक्षिणी कमेटी के अधीन है। ये सभी मंदिर शिखरबद्ध है। इनमें से मंदिर नं. 15 ग्वालियर के भट्टारक का बनवाया हुआ है जो कि विक्रम संवत 800 का बताया गया है यह बहुत विशाल मंदिर है इस मंदिर में मूलनायक भगवान अरहनाथ की प्रतिमा है तथा मंदिर की चहारदिवारी के अंदर एक प्राचीन बावडी है जिसका जल बड़ा स्वादिष्ट एवं स्वास्थ्यवर्द्धक माना जाता है। पहाडी के चारो ओर परिक्रमा-पथ बना हुआ है। इसके चारो कोनो पर चार छत्रियाँ है, जिनमें चरण-चिन्ह बने हुए है यह परिक्रमा-पथ ही क्षेत्र की सीमा-रेखा है। पहाड के किसी ऊँचे स्थल पर खडे होकर देखे तो पहाड पर शिखरबद्ध मंदिरों की श्रृंखला शिखरों पर सूर्य के प्रकाश में चमकते हुए कलश और उनके ऊपर लहराती हुई ध्वजायें बडी मनोरम और मनोमुग्धकारी प्रतीत होती है।यहाँ का मन्दिर नं. 57 मुख्य मंदिर है जो चन्द्रप्रभ मंदिर है और इसमें मूलनायक भगवान चन्द्रप्रभ है। यह मूर्ति विशाल भव्य और अतिशय सम्पन्न है। भगवान चन्द्रप्रभ के पावन जीवन के साथ इस पर्वत का विशिष्ट सम्बन्ध जुडा हुआ है अतः इस पर्वत पर चन्द्रप्रभ भगवान को मूलनायक के रूप में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इस मंदिर के निकट एक छत्री में मुनि नंग एवं अनंग कुमार के चरण चिन्ह विराजमान है।

    क्षेत्र पर भट्टारकों की चार गद्दियां रही थी प्रायः सभी प्रतिमाओं की प्रतिष्ठा इन्हीं गद्दियों के भट्टारकों द्वारा की गयी है।

     

     

    मेला…..

  • क्षेत्र पर वार्षिक मेला चैत कृष्णा 1 से 5 तक भरता है। क्षेत्र पर वि.सं. 1885 में गजरथ, वि.सं. 2007 में मानस्तम्भ प्रतिष्ठा और वीर सं. 2480 में बाहुबली महामस्तकाभिषेक हुआ था।

उपलब्ध सुविधाएं

श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र - सोनागिरिजी

क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ

आवास – कमरे (अटैच्ड स्नानगृह) – 30, (बिना स्नानगृह) – 20,   हाल – 3, गेस्ट हाऊस – 1, यात्री ठहराने की कुल क्षमता – 250, भोजनशाला – निःशुल्क, नियमित, पुस्तकालय – नहीं, औषधालय – उपलब्ध, , विद्यालय – उपलब्ध  –  अन्य अनेक संस्थाओं द्वारा संचालित धर्मशालाऐं भी उपलब्ध है।

आवागमन के साधन

रेल्वे स्टेशन – सोनागिरि – 5 कि.मी.।

बस स्टैण्ड – दतिया – 15 कि.मी.

 पहुंचने का सरलतम मार्ग – सड़क रेलमार्ग से 3 कि.मी. दतिया ग्वालियर-झाँसी हेतु सड़क मार्ग – 5 कि.मी.।

समीपस्थ तीर्थ क्षेत्र

ध्यावलजी – 50 कि.मी., गोपांचल – 70 कि.मी., सिहोनिया – 120 कि.मी., करगुँवा-झांसी (उ.प्र.) – 50 कि.मी.।

प्रबन्ध व्यवस्था

क्षेत्रीय व्यवस्था प्रबन्धकारिणी कमेटी:

संस्था – श्री दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र सोनागिरि संरक्षिणी कमेटी

अध्यक्ष – श्री डालचन्द जैन, सागर (07582-249789, 249110)

मंत्री – श्री ज्ञानचन्द जैन, अधिवक्ता, ग्वालियर (09425109217)

प्रबन्धक – श्री अशोककुमार जैन (07522-262222, 262375)

तीर्थक्षेत्र की वेबसाइट
भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी
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धर्मशाला आरक्षित करें
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निकटतम प्रमुख नगर:
दतिया - 15 कि.मी., ग्वालियर - 70 कि.मी.।
प्रमुख विशेषताएँ
क्षेत्र पर वार्षिक मेला चैत कृष्णा 1 से 5 तक भरता है। क्षेत्र पर वि.सं. 1885 में गजरथ, वि.सं. 2007 में मानस्तम्भ प्रतिष्ठा और वीर सं. 2480 में बाहुबली महामस्तकाभिषेक हुआ था।

भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी

भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी का इतिहास

देश भर में दूरदूर तक स्थित अपने दिगम्बर जैन तीर्थयों की सेवा-सम्हाल करके उन्हें एक संयोजित व्यवस्था के अंतर्गत लाने के लिए किसी संगठन की आवश्यकता है , यह विचार उन्नीसवीं शताब्दी समाप्त होने के पूर्वसन् 1899 ई. में, मुंबई निवासी दानवीर, जैन कुलभूषण, तीर्थ भक्त, सेठ माणिकचंद हिराचंद जवेरी के मन में सबसे पहले उदित हुआ ।


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