हमारी उपलब्धियाँ

देश भर में स्थित विभिन्न दिगम्बर जैन तीर्थों की देखरेकरके उन्हें एक संयोजित व्यवस्था के अंतर्गत लाने के लिए किसी संगठन की आवश्यकता है, यह विचार उन्नीसवीं शताब्दी समाप्त होने के पूर्वसन् 1899 ई.में मुंबई निवासी दानवीर, जैनकुलभूषण, तीर्थ भक्तसेठ माणिकचंद हिराचंदजवेरी के मन में सबसे पहले उदित हुआ ।
सेठ साहब मुंबई प्रांतीय दिगम्बर जैनसभा के सर्वेसर्वा थे। अपने संकल्प को साकार करने के लिए उन्होंने उसी सभा में तीर्थ रक्षा विभाग की स्थापना की तथा समीपस्थ शत्रुंजय,तारंगा और पावागढ़ आदि क्षेत्रों पर जीणोद्धार एवं व्यवस्था संबंधी कार्य प्रारम्भ कराये ।यह व्यवस्था सेठ माणिकचंदजी के विराट संकल्पों की पूर्ति नहीं कर पाई । इतने बड़े देश में फैले हुए अनगिनत दिगम्बर जैन तीर्थों की रक्षा के लिए एक स्वतंत्र संस्था की आवश्यकता उनके दूरदर्शी मन में प्रखरता से उभरती रही ।
भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासभा के अधिवेशनों के अवसर पर जवेरी जी ने अपने पूज्य तीथों के विधिवत संरक्षण और संचालन की आवश्यकता समाज के सामने प्राथमिकता के रूप में प्रस्तुत की। उनके विचारों को समाज की सहमति प्राप्त हुई और इस लक्ष्य कीपूर्ति के प्रति समाज में एक उत्साह भरा वातावरण बनने लगा ।

यों तो सन् १९९७ में रांची उच्च न्यायालय की एकल पीठ के फैसले से मूर्तिपूजक श्वेताम्बर जैन समाज को गहरा आघात लगा था, परन्तु इस बार दिनांक २५/९/२००४ को रांची उच्च न्यायालय की पूर्ण पीठ के फैसले से सेठ आनंदजी कल्याणजी के स्वामित्व के सभी अधिकार ध्वस्त हो गये। न्यायालय ने शिखरजी तीर्थ के प्रबंधन के लिए झारखण्ड राज्य सरकार को दिगम्बर-श्वेताम्बर मंदिरों की तथा ४६ एकड़ भूमि की व्यवस्था हेतु एक प्रबंधन कमेटी की रचना करने तथा उसमें दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों को सम्मिलित करने के लिए कहा है। इस प्रबंधन कमेटी के अध्यक्ष के रूप में जिलाधिकारी उपायुक्त होंगे तथा राज्य सरकार व्यवस्था देखने के लिए एक प्रशासक की नियुक्ति कर सकती है तथा आवश्यकता पड़ने पर कानून भी बनाने का सुझाव झारखण्ड राज्य को दिया गया है। इस कष्टसाध्य सफलता प्राप्त करने में भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी की विपुल धनराशि व्यय हुई है। केस में सफलता प्राप्त होने में हमारे तत्कालीन अध्यक्ष साहू अशोक कुमार जैन का सहयोग रहा, इसके साथ-साथ सभी आचार्यों, मुनिराजों, आर्यिका माताओं के आशीर्वाद व समस्त दिगम्बर जैन समाज का सहयोग रहा है।

इस प्रकार तीर्थक्षेत्र कमेटी के माध्यम से एवं दिगम्बर जैन समाज के सहयोग से तीर्थक्षेत्रों में जो भी कार्य हुए हैं उनके लिए तीर्थक्षेत्र कमेटी सभी के प्रति आभारी है। तीर्थक्षेत्र कमेटी ने तीर्थों का संरक्षण करने एवं उनका जीर्णोद्धार कर-कराकर उन्हें यथावत रूप में भावी पीढ़ी को सौंपने तथा तीर्थ भक्तों के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरसक प्रयत्न दशकों से कर रही है। आप सभी को जानकार गर्व होगा कि पिछले २०-२५ वर्षों में जिस तेजी के साथ तीर्थक्षेत्र कमेटी ने अपने उत्तरदायित्वों को निर्वाह है उससे संपूर्ण भारतवर्ष का दिगंबर जैन समाज परिचित है। यह आप सभी के असीम सहयोग एवं वात्सल्य भावना का ही सुपरिणाम हैं।

तीर्थक्षेत्र कमेटी के प्रमुख पड़ाव

१) भारत के समस्त दिगम्बर जैन तीर्थों का प्रामाणिक परिचय कराता हुआ दिगम्बर जैन तीर्थ ग्रन्थ भाग १ ते ५ तक का प्रकाशन।

२) ६५ तीर्थक्षेत्रों का सर्वेक्षण कराकर उनके महत्वपूर्ण रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा गया। शेष क्षेत्रों का सर्वेक्षण कार्य प्रगति पर है।

३) शिखरजी पहाड़ पर स्थित डाक बंगले में तीर्थयात्रियों के आवास एवं नि:शुल्क भोजन की व्यवस्था।

४) शिखरजी पहाड़ की वंदना हेतु जाने-आने के मार्ग का पक्कीकरण, छतरियों, बेंचों एवं पुलों का निर्माण, गंधर्व नाले के पास भाताघर का पुनरोद्धार कर नवीनीकरण किया गया है।

५) शिखरजी (मधुबन) में शाखा कार्यालय भवन का निर्माण।

६) शिखरजी पर तीर्थयात्रियों की सुरक्षा हेतु रक्षकों एवं नित्य-नियमित टोकों के पूजा-प्रक्षाल हेतु पुजारियों की नियुक्ति की गई है।

७) पहाड़ पर प्राथमिक चिकित्सा एवं पेयजल की व्यवस्था रखी गई है।

८) पहाड़ पर पूजन सामग्री, शास्त्र भण्डार एवं छत्र आदि की सुविधा है।

९) तीर्थ सुरक्षार्थ टोकों पर तीर्थक्षेत्र कमेटी की दान पेटी रखी गई है।

१०) पारसनाथ पहाड़ पर नित्य आरती एवं स्थायी पूजन व्यवस्था तथा त्यौहारों पर श्रीजी की मूर्ति विराजमान कर अभिषेक का आयोजन।

११) पारसनाथ टोंक पर अखण्ड पाठ एवं शांति विधान का समय-समय पर आयोजन।

१२) मधुबन में यात्री निवास की व्यवस्था एवं नाममात्र शुल्क पर भोजनालय।

१३) सन्मति साधना स्कूल-सड़क का निर्माण एवं मधुबन ग्राम के आसपास के ग्रामवासियों के शैक्षणिक एवं चिकित्सार्थ जनकल्याणकारी भोजनाएं।

समिति साधन और दायित्व:-

तीर्थक्षेत्र का संरक्षण, संवर्धन, सुचारु संचालन, सुव्यवस्था एवं जैन पुरातत्व के अवशेषों के संरक्षण का प्रमुख दायित्व संभालते हुए आपकी इस संस्था ने अपने कार्यकाल के ११७ वर्ष पूरे कर लिये हैं। स्थापना काल से तीर्थक्षेत्र कमेटी की अधिकांश शक्ति तीर्थक्षेत्रों के संरक्षण विशेषकर तीर्थराज श्री सम्मेदशिखरजी के संरक्षण- संवर्धन और उसके समुन्नत विकास में लगी है। यह प्रसन्नता की बात है कि काफी समय से लंबित शिखरजी तीर्थ के विवाद में दिगम्बर जैन समाज को सफलता मिली है और शिखर की प्रबंध व्यवस्था में उसे बराबर का हक न्यायालय ने दिया है। न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए तीर्थक्षेत्र कमेटी ने वहां विकास के जो नये कार्यक्रम बनाये हैं और जिनके बारे में हमने उपरोक्त पंक्तियों में आप सभी का ध्यान आकृष्ट किया है।

परमपूज्य स्व. आचार्य समंतभद्रजी महाराज एवं स्व. मुनि श्री १०८ आर्यनंदीजी महाराज की प्रेरणा व आशीर्वाद तथा वर्तमान में परम पूज्य अमरकीर्तिजी महाराज व मुनि श्री अमोघकीर्तिजी महाराज तथा  दिगम्बर जैन समाज के सहयोग से तीर्थक्षेत्र कमेटी में करीब १० करोड़ रुपये का ध्रुवफण्ड एकत्रित हुआ है. जिसके ब्याज की आमदनी से उपरोक्त कार्यक्रमों का संचालन हो रहा है। आप सभी ने यह अनुभव किया होगा कि सरकार की बदलती नीतियों के कारण हमें इनवेस्टमेंट पर जो ब्याज मिलता था उसमें काफी कमी आयी है। ऐसी परिस्थिति में समाज का सहयोग आवश्यक है। वर्तमान में जो कार्यक्रम चल रहे हैं उन्हें गति प्रदान करने एवं तीर्थक्षेत्रों के संरक्षण, संवर्धन और उनके समुन्नत विकास में विपुल धनराशि की आवश्यकता है।

तीर्थक्षेत्रों/पुरातत्व महत्व के प्राचीन जिनमंदिरों का जीर्णोद्धार:-

तीर्थक्षेत्र कमेटी जहां एक ओर लाखों रुपयों की धनराशि तीर्थक्षेत्रों के हकों एवं अधिकारों को सुरक्षित रखने पर व्यय कर रही है वहीं दूसरी ओर जीर्णशीर्ण हो रहे तीर्थक्षेत्रों के पुरातत्व महत्व के प्राचीन मंदिरों के जीर्णोद्धार एवं यात्री सुविधा में सहयोग दे रही है। जैसे-जैसे कमेटी की स्थिति सुदृढ़ होती गई वैसे-वैसे सहायता की राशि में अभिवृद्धि कर स्थानीय प्रबंध समितियों को सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

अंचलीय समितियों का गठन:

देश के कोने-कोने में फैले २०० से अधिक तीर्थक्षेत्रों की सुरक्षा, उनका सुचारू-संचालन व जीर्णोद्धार आदि कायाX का कमेटी स्वयं जाकर निरीक्षण करे यह संभव नहीं है। इसके लिए आवश्यक समझा गया कि प्रत्येक प्रांत की अलग समितियों का गठन कर उनकी अनुशंसानुसार तीर्थक्षेत्रों के जीर्णोद्धार एवं यात्री सुविधा तथा सम्यक विकास में सहयोग दिया जाय। इस उद्देश्य से महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, पूर्वांचल, राजस्थान, कर्नाटक एवं तमिलनाडू, केरल, आन्ध्रप्रदेश एवं पांडिचेरी अंचलिय समितियों का गठन किया गया है और उनकी अनुशंसानुसार यह कमेटी आर्थिक एवं अन्य प्रकार से सहयोग प्रदान कर रही है। उत्तर प्रदेश अंचल के लिए स्वतंत्र कमेटी गठित करने का प्रयास चल रहा है।

तीर्थक्षेत्र प्रबंधन प्रशिक्षण प्रशिक्षण संस्थान, द्रोणगिरि:-

कई तीर्थक्षेत्रों पर कुशल एवं प्रशिक्षिक कार्यकर्ता (मैनेजर, मुनीम) उपलब्ध नहीं हो सकने से तीर्थक्षेत्रों के विकास की गति अवरुद्ध थी। इस पर विचार करते हुए तीर्थक्षेत्र कमेटी ने यह आवश्यक समझा कि इसके लिए तीर्थक्षेत्र कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यक्रम बनाकर उसके माध्यम से समाज के नवयुवकों को प्रेरणा देकर उन्हें इस कार्य के लिए प्रशिक्षित किया जाये, जिससे हमारे तीर्थक्षेत्रों की सुरक्षा- व्यवस्था में उत्तरोत्तर विकास हो सके। इसके लिए श्री द्रोणगिरि क्षेत्र पर तीर्थक्षेत्र प्रबंधन प्रशिक्षण प्रशिक्षण संस्था की स्थापना की गई है, जिसमें नवयुवकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है, संस्थान के इस वर्ष 20 वर्ष पूरे हो रहे हैं। समाज को यह जानकर हर्ष होगा कि यहां के कई प्रशिक्षित कार्यकर्ता विभिन्न तीर्थक्षेत्रों, मंदिरों एवं संस्थाओंमें नियुक्त किये गये हैं और उनकी प्रशंसा प्राप्त हो रही है।

शाश्वत तीर्थ श्री सम्मेदशिखर जी की प्राचीन पवित्र टोकों का जीर्णोद्धार

जैन समाज के लिए यह गौरव की बात है कि दशाब्दियों के बाद उसे सम्मेदशिखर पहाड़ स्थित सभी टोकों एवं मंदिरों के जीर्णोद्धार का शुभ अवसर प्राप्त हुआ है। जैन समाज के परस्पर सहयोग से पवित्र तीर्थ की सभी टोकों के आसपास का परिसर, रेलिंग एवं सीढियां आदि बनाकर उन्हें वंदना करने के लिए काफी सुगम बनाया गया है। कई टोकों के गुंबद जो तेज हवा एवं अन्य प्राकृतिक प्रकोपों से क्षतिग्रस्त हो गये थे उनका जीर्णोद्धार कर व्यवस्थित किया गया है। जीर्णोद्धार के इस कार्य को सुव्यस्थित और सुंदर ढंग से करने के लिए मकराना (जयपुर) से कुशल कारीगरों द्वारा सुंदर कारीगारी कराकर कार्य संपन्न किया गया है। जिन टोकों के ध्वजटण्ड टूट गये थे उन्हें ठीक कराया गया हैं। स्तंभ जो टूटे हुए थे उन्हें भी दुरुस्त कराया गया है। इस प्रकार सभी टोकों पर रंग रोगन कराकर उन्हें सुंदर बनाया गया है, ताकि हर यात्री सुविधापूर्वक टोकों की वंदना कर अपना आत्मकल्याण कर सके।

४५ हजार फीट ऊंचे पहाड़ की टोकों का जीर्णोद्धार कराना काफी श्रमसाध्य एवं खर्चीला कार्य है, जिसे जैन समाज के परस्पर सहयोग से ही पूरा किया जा सका है। इसी आलोक में आप सभी को यह जानकर अत्यधिक हर्ष होगा कि जैन समाज के परस्पर सहयोग से ही पारसनाथ एवं गौतम स्वामी टोंक पर ४-४ नये पूजा कक्ष बनाये गये हैं जिनका लाभ हमें मिल रहा है।

भावी योजनाएँ

१) प्राचीन तीर्थक्षेत्र के संरक्षण संवर्धन और उनके समुन्नत विकास में सहयोग देना।

२) शेष तीर्थक्षेत्रों का सर्वेक्षण कराकर उनके राजस्व व भूमि संबंधी रिकॉर्ड को सुव्यवस्थित करना।

३) सम्मेदशिखर, श्री अंतरिक्ष पार्श्वनाथ क्षेत्र सिरपुर, श्री ऋषभदेव (केसरियाजी), श्री गिरनारजी आदि तीर्थक्षेत्रों पर चल रहे मुकदमों का संचालन करना।

४) सम्मेदशिकर पहाड़ पर नई धर्मशाला बनाना।

५) मधुबन में सुविधायुक्त विशाल धर्मशाला का निर्माण करना।

६) भाताघर का अधूरा कार्य पूर्ण करना एवं पेयजल की व्यवस्था करना।

७) तीर्थ वंदना प्रतीक का निर्माण।

८) तीर्थक्षेत्र कार्यकर्ता प्रशिक्षण योजना का संचालन।

९) तीर्थक्षेत्र कमेटी की पुरानी वेबसाइट को संशोधित कर नई वेबसाईट बनाने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। यह कार्य वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री प्रभातचंद्र जैन के मार्गदर्शन में चल रहा है।

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Representatives

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तीर्थक्षेत्र

आंचलिक समितियों का गठन

भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी की नियमावली की धारा 11 केअनुसार कमेटी के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किसी अंचल, किसी एक प्रदेश अथवाएकाधिक प्रदेशों को मिलाकर अंचलीय समितियों के गठन का प्रावधान है, यह समितियां उस अंचल में कमेटी के समस्त सदस्यों द्वारा गठित की जाती है ।आंचलिक समितियों के लिए भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी की पदाधिकारीपरिषद द्वारा एक नियमावली स्वीकृत की गई है जिसके अनुसार कमेटी के अध्यक्ष केचुनाव के 6 महीने के भीतर अंचलीय समिति के अध्यक्षों का चुनाव होने का प्रावधानहे । तदनुसार समय-समय पर आंचलिक समिति के
अध्यक्षों के चुनाव होते रहे है ।
वर्तमान में भी राजस्थान अंचल, तमिलनाडु, पांडिचेरी, केरल एवं आंध्रप्रदेशअचल, पूर्वाचल, महाराष्ट्र अंचल, गुजरात अंचल एवं मध्यांचल समितियों केअध्यक्षों के चुनाव सम्पन्न हुए है।

तीर्थक्षेत्र सर्वेक्षण योजना

इस योजना के अंतर्गत क्षेत्र की चल-अचल सम्पत्ति और स्वामित्व सिद्ध करनेवाले दस्तावेजों, ग्राम पंचायत के संपति कर के कागज, सनद, सोने-चांदीकी मूर्ति तथा वस्तुओं की सूची, शिलालेख, अंकेक्षित तुलन पत्र (हिसाब किताब),न्यास अधिनियम केअंतर्गत हुए पंजीकरण प्रमाण-पत्रट की सत्य प्रतिलिपियों के साथ, इसके लिएछपाये गये तीर्थ सर्वेक्षण फार्म को भरकर संबंधित कागजातों के साथ तैयार कियाजाता है । महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान के तीर्थक्षेत्रों का सर्वेक्षण करने के बादमध्यप्रदेश के कुछ क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया गया है । कई क्षेत्रों का सर्वेक्षण होना बाकीहै । कुछ नये क्षेत्र सम्बद्ध हुए हैं उनका भी सर्वेक्षण होना है जिसका प्रयास चल रहा है।

धर्मशाला

कार्य और कार्यालय

मुंबई स्थित हीराबाग धर्मशाला में सेठ माणिकचंदहीराचंद ट्रस्ट की ओर सेभारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी एवं ट्रस्ट के कार्यालय के लिए नि:शुल्करूप से स्थान उपलब्ध कराया हुआ है। इतना ही कमेटी के स्थापनाकाल से इस ट्रस्टकी ओर से रु. 5000/- की राशि तीर्थक्षेत्र कमेटी को आवर्तक व्यय हेतु प्रदान की जा रही है ।

सन् 1970 में इसका जीर्णोद्धार कराया गया था उसके बाद गत वर्ष पूर्वअध्यक्ष श्री नरेश कुमार सेठी के अध्यक्षीय कार्यकाल में इसका जीर्णोद्धार कराकरउसे वातानुकूलित करके नयेफर्नीचर से सुसज्जित किया गया है। रेकॉर्ड रूम कोआवश्यकतानुसार नया फर्नीचर खरीदकर सुसज्जित कराकर उसमें सभी आवश्यकअभिलेख को सुरक्षित रखा गया है।

  • तीर्थक्षेत्र कमेटी की स्थापना के समय से चुने गये सभासद

    1. स्याद्वादवारिधिपं. गोपालदास जी बरैया, मुरैना (ग्वालियर)
    2. श्री बाबू अण्णाजीपाटिल, बी.ए.मजिस्ट्रेट- कोल्हापुर
    3. श्री लाला सलेखचन्दजी रईस, नजीबाबाद (बिजनौर)
    4. श्री लाला किशोरीचन्द जी, रावलपिण्डी
    5. श्री शाह जयसिंह भाई- सेकण्ड मजिस्ट्रेट, आमोद(भरोच)
    6. श्री पारिखलल्लूभाईप्रेमानन्दएल. सी.ई., मुंबई
    7. श्री सेठमाणिकचन्दपानाचन्द जी जवेरी, मुंबई
    8. श्री सेठचुन्नीलालझवेरचन्द, मुंबई ।
    9. श्री दिलसुखरायरघुनाथदास जी रईस, सरनौ
    10. श्री शाह शंकरलाल जी गांधी, आमोद
    11. श्री लाला मुंशीलाल जी, एम.ए., लाहोर
    12. श्रीमंत सेठ मोहनलालमथुरादास जी, खुरई
    13. श्री राजा ज्ञानचन्द जी मुसविरजंग, सिकन्दराबाद (हैदराबाद)
    14. श्रीमंत सेठ गोपाल शाह पूरणमल शाह आ.मेजि., सिवनी
    15. श्री भाऊतात्याचिवटे, कुरुंदवाड़

  • 16. श्री सेठ मथुरादासजी, ललितपुर
    17. श्री लाला देवीदासजी, चौक बाजार, लखनऊ
    18. श्री सेठ सर्वसुखदास जी खजांची, जयपुर
    19. श्री लाला हुलासरायजीरूपचंदजी रईस, सहारनपुर
    20. श्री सेठहरसुखदासजीऑ.मजि., हजारीबाग
    21. श्री सेठ दामोदरदासजी, मथुरा
    22. श्री सेठ धनप्रसाद जी, बण्डा
    23. श्री शाह लालचन्दकहानदास, बड़ौदा
    24. श्री सेठ सेवाराम जी , उज्जैन
    25. श्री भ.म.श्रीचारुकीर्तिजीपण्डिताचार्य, मूडबद्री
    26. श्री बा. धन्नूलालजी अटॉर्नी, कोलकाता
    27. श्री सेठ अमोलकचन्दजी, इन्दौर
    28. श्री भाई दरयावसिंहजीसोधिया, इन्दौर
    29. श्री गांधी बहालचंद जी, सोलापुर
    30. श्री हजारीमलकिशोरीलालजीऑ.मजिस्ट्रेट, गिरिडीह
    31. श्री एम.अनंतराजैया (म्युनिसिपल कमिश्नर, मैसूर)।
    32. श्री रामसरूपजीछपरमुहरा, कानुपर
    33. श्री बाबू बनारसीदासजीएम.ए.एल.एल.बी., सहारनपुर
    34. श्री ब्र. रामचन्दजीदक्षिणदेश।
    35. सेठ हिराचंदनेमीचंदजीऑन. मजिस्ट्रेट, सोलापुर
    35. सेठ हिराचंदनेमीचंदजीऑन. मजिस्ट्रेट, सोलापुर

  • 36. श्री लाला चिरंजीलाल जी जवेरी, दिल्ली
    37. श्री सेठगुरुमुखरायसुखानन्दजी, मुंबई
    38. श्री फूलचन्दजी पाटनी, मुंबई
    39. श्री रा.रा. रामासावजी, वर्धा
    40. श्री सुखलालजीऑन.मजिस्ट्रेट म्युनिसिपल वाइसप्रेसीडेन्ट,
    छिन्दवाड़ा
    41. श्री बाबू देवकुमारजी रईस ऑन.मजिस्ट्रेट, आरा
    42. श्री बाबू बच्चूलालजी रईस ऑन.मजिस्ट्रेट, आरा
    43. श्री सेठ नेमलालजीपासूसाब, नागपुर
    44. श्री मोतीचन्दमाणिकचन्दजी मोदी, रोपला
    45. श्री शाह वालचंदसखाराम, मोहोल, सोलापुर
    46. श्री लखमीचन्दखुशालचन्द, बागधरी, सोलापुर
    47. श्री अण्णाप्पाफन्नप्पाचौगुले वकील, बेलगाँव
    48. श्री लाला सुल्तानसिंहजीअ.म., दिल्ली
    49. श्री लाला स्नेहीलालजीअमीरसिहजी, दिल्ली
    50. श्री बाबू प्यारेलालजी वकील, दिल्ली
    51. श्री लाला ईश्वरीप्रसादजी रईस ऑन. मजिस्ट्रेट म्युनि.कमिश्नर
    गवर्नमेंटट्रेझरर बड़ा दरीबा, दिल्ली
    इसके बाद इस प्रबंध समिति में समय-समय पर और नये सदस्यों कोजोड़ा गया
    है ।

    सेठ हुकमचंदजी

    सेठ हुकमचंदजी कासलीवाल का परिचय

    इंदौर। दुनिया भर में प्रसिद्ध और विवादास्पद संत ओशो यानी रजनीश ने एक प्रवचन में इंदौर के सर सेठ हुकुमचंद का जिक्र बड़े ही रोचक अंदाज में किया था। ओशो ने उन्हें उस समय के दुनिया के सबसे अमीर लोगों में से एक बताया था। उस जमाने में सेठ हुकुमचंद के नाम का डंका इंदौर से लेकर लन्दन के स्टॉक एक्सचेंज तक बजता था। उनकी आलीशान हवेली आज भी उनके गौरव की कहानी कहती है।14 जुलाई को सेठ हुकुमचंद का जन्मदिन है।।

    – इंदौर के सर सेठ हुकुमचंद का नाम भारत की पहली पीढ़ी के उद्योगपतियों में लिया जाता है। उन्होंने सन 1917 में कोलकाता में देश की पहली भारतीय जूट मिल की स्थापना की थी। कोलकाता में उनकी एक स्टील मिल भी थी। इसके अलावा उन्होंने इंदौर में तीन कपड़ा मिलें (राजकुमार, कल्याणमल और हुकुमचंद मिल )और एक शेविंगब्लेड बनाने का कारखाना भी लगाया था। इंदौर की हुकुमचंद मिल उस जमाने की सबसे आधुनिक कपड़ा मिल थी।

    – 1940 के दशक में उन्होंने मुंबई में वल्कन के नाम से एक साधारण बीमा कंपनी की स्थापना की थी। उज्जैन में भी उनकी एक कपड़ा मिल थी। इसके अलावा इंदौर,खंडवा, सेंधवा और भीकनगांव में जीनिंग और प्रोसेसिंगइकाइयाँ भी थीं।

    – उनके कारोबार और उनकी प्रसिद्धि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आचार्य रजनीश, ओशो ने अपने एक प्रवचन में उन्हें उस समय के दुनिया
    के सबसे अमीर लोगों में से एक बताया था। इसका जिक्र ओशोबाइबिल नामक किताब के आठवे खंड में है। इसमें ये भी जिक्र है कि सेठ हुकुमचंद के पास सोने की रोल्सरॉयस कार थी। इस कार के कुछ फोटो आज भी ऑटोमोबाइल्स की कुछ वेबसाइटों पर देखे जा सकते है। उन्होंने भगवान महावीर की रथयात्रा के लिए सोने का एक रथ भी बनवाया था।

    – उनके रसूख का आलम ये था कि लंदनस्टाक एक्सचेंज के दलालों को जब ये पता चलता था कि वे किसी कंपनी के शेयर खरीद रहें हैं तो उस कंपनी के शेयर के भाव आसमान छूने लगते थे। आजादी के पहले उनकी गिनती टाटा और बिड़ला के बराबर होती थी।इंदौर के महाराजा होलकर अपने दरबार में उन्हें अपने साथ की कुर्सी पर बैठाते थे।तत्कालीन होलकर राजा के कहने पर उन्होंने अंग्रेजों को करोड़ों रूपए का कर्जा बिना ब्याज के दिया था। इसके चलते अंग्रेजों ने उन्हें सर और महाराजा होलकर ने राजा राव की उपाधि से सम्मानित किया था।

    – भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी, बनारस का काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, इंदौर का कस्तूरबाग्राम, नसिया धर्मशाला, प्रेमदेवी अस्पताल और कांच मंदिर और दिल्ली के लेडीहार्डिंगमेडिकलकॉलेज सहित देश भर में 200 से ज्यादा स्कूल,कॉलेज, मंदिर, धर्मशाला, अस्पताल और होस्टल बनाने के लिए उन्होंने दान किया था। एक आकलन के अनुसार 1950 तक उन्होंने करीब 80 लाख रुपए का दान किया था।

    – इंडेक्सिंग और इन्फ्लेशनरेट के आधार इसकी गणना की जाए तो ये रकम आज के 4200 करोड़ के बराबर होती है। उनका महल किसी राजा महाराजा की तरह था। इसके भीतर सोने की नक्काशी की गई है। उनके वंशज आज भी यहीं रहते हैं। मूल फर्म सेठ हुकुमचंदसरूपचंद प्राइवेट लिमिटेड अभी भी कायम है। अपनी उद्यमिता, दूरदृष्टि और नेतृत्व से दुनिया भर में अपनी धाक जमाने वाले इस महान उद्योगपति का जिक्र केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की किताबों में देश के महान उद्योगपतियों में किया गया है।

    सर सेठ हुकुमचंद का यह अमूल्य योगदान है

    एक समय था जब इंदौर मिलों के लिए जाना जाता था। कई मिलें थी और इसी के कारण टेक्सटाइल में शहर का नाम देशव्यापी स्तर पर था। आज इंदौर व्यावसायिक रूप से जितना समृद्ध और विकसित हुआ है, उसमें सर सेठ हुकुमचंद का बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका थी।

    उन्होंने सूती उद्योग की शुरुआत की थी। उन्हें कॉटनकिंग कहा जाता था। इस उद्योग के लिए उन्होंने इंग्लैड से मशीनें मंगाई थी। उनका शहर के आर्थिक विकास में तो योगदान था ही, साथ ही सामाजिक क्षेत्र में उनका योगदान था।

    मध्यभारत हिंदी साहित्य समिति के सम्मेलन में जब महात्मा गांधी इंदौर आए थे, इसी सम्मेलन में उन्होंने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की घोषणा की थी। तब सर सेठ हुकुमचंद ने समिति को सहयोग भी दिया था। उन्हीं के निमंत्रण पर महात्मा गांधी उनके घर भी गए थे। यहीं गांधीजी के कहने पर सर सेठ हुकुमचंद ने बहुत बड़ी ज़मीन दान दी थी जहां कस्तूरबाग्राम बनाया गया। आज यह महिलाओं के शैक्षणिक-सामाजिक उत्थान का बड़ा केंद्र है।

    जहां तक मिलों का सवाल है तो यहां की एक मिल में मशहूर चित्रकार एम.एफ. हुसैन के पिता टाइम कीपर की नौकरी किया करते थे। एम.एफ. हुसैन ने न केवल होलकरों को खूबसूरत पेंटिंग्स की हैं बल्कि उन्होंने सर सेठ हुकुमचंद के रेखांकन और पेंटिंग्स बनाई थी जो आज धरोहर है।

    पदाधिकारीगण

    भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के
    भूतपूर्व ववर्तमान पदाधिकारीगण

    • परम संरक्षक कालावधि
      धर्माधिकारी श्री वीरेन्द्र हेगड़े, धर्मस्थल १९९२ से आज तक
      श्री नरेशकुमार सेठी, जयपुर जुलाई, २००८ से आज तक
      श्री अशोक कुमार पाटनी, मदनगंज-किशनगढ़ जुलाई,२००८ से आज तक
      श्री आर. के.जैन, मुम्बई अगस्त-२०१३ से आज तक
      स. सिंघई श्री सुधीर जैन, कटनी फरवरी-२०१६ से आज तक
      श्रीमती सरिता एम.के. जैन, चैन्नई नवम्बर २०१८ से आज तक
    • अध्यक्ष कालावधि
      १. स्व. सर सेठ हुकुमचन्दजी जैन (कासलीवाल), इन्दौर १९१० से १९५९ तक
      २. स्व.श्री साहू शांतिप्रसाद जैन, मुंबई १९६४ से १९७२ तक
      ३. स्व.श्रीमान् सेठ लालचन्द हिराचंदजी, मुंबई १९७२ से १९८३ तक
      ४. स्व.श्री साहू श्रेयांसप्रसाद जैन, मुंबई १९८३ से १९८७ तक
      ५. स्व.श्री साहू अशोक कुमार जैन, नई दिल्ली १९८७ से ४ फरवरी १९९९ तक
      ६. स्व.श्री साहू रमेशचन्द जैन, नई दिल्ली ११ अप्रैल, १९९९ से २२ सितम्बर,२००४ तक
    • अध्यक्ष कालावधि
      ७. श्री नरेश कुमार सेठी, जयपुर १७ अक्टू.२००४ से २२ जून, २००८ तक
      ८. श्री आर.के.जैन, मुंबई २२ जून,२००८ से २५ अगस्त २०१३ तक
      ९. स. सिंघई श्री सुधीर जैन, कटनी २५ अगस्त २०१३ से २५ फरवरी २०१६ तक
      १०. श्रीमती सरिता एम.के.जैन, चैन्नई २५ फरवरी २०१६ से २५ नवम्बर २०१८ तक
      ११. श्री प्रभातचंद्र एस.जैन, मुम्बई २५ नवम्बर २०१८ से आज तक
    • उपाध्यक्ष कालावधि
      १. स्व. सेठ गुलाबचन्द हिराचन्दजी दोशी, मुम्बई
      २. स्व.धर्मवीर सेठ सर भागचन्द सोनी, अजमेर अगस्त १९७५ से १९८३ तक
      ३. स्व.श्री रा.ब.राजकुमार सिंह , इन्दौर १९७५ से १९८७ तक
      ४. स्व.श्री सेठ रतनचंद चुनीलाल जवेरी, मुंबई १९६४ से १९८१ तक
      ५. स्व.श्री शांतिप्रसाद जैन, नई दिल्ली १९७२ से १९७७ तक
      ६. स्व.श्री सेठ लालचन्द हिराचंदजी, मुंबई १९८३ से १९९३ तक
    • उपाध्यक्ष कालावधि
      ७. स्व.श्री साहू श्रेयांसप्रसाद जैन, मुंबई १९८७ से १९९२ तक
      ८. स्व.श्री साहू अशोक कुमार जैन, नई दिल्ली १९८३ से १९८७ तक
      ९. स्व.श्री रा.ब.सेठ हरकचंद जैन, रांची १९७५ से १९९२ तक
      १०. स्व.श्री देवकुमारसिंह कासलीवाल,इन्दौर १९८३ से मई २००३ तक
      ११. श्री अरविन्द रावजी दोशी, मुंबई १९८२ से १९९२ तक
    • उपाध्यक्ष कालावधि
      १२. धर्माधिकारी श्री वीरेन्द्र हेगड़े, धर्मस्थल १९८३ से १९९२ तक
      १३. स्व.श्री ज्ञानचन्द खिन्दूका, जयपुर १९८७ से १९९५ तक
      १४. स्व.श्री रतनलाल गंगवाल, नई दिल्ली नवम्बर १९९२ से अगस्त १९९४ तक
      १५. स्व.श्री जयचन्द डी. लोहाड़े, हैदराबाद नवम्बर १९९२ से मार्च २००१ तक
      १६. स्व.श्री उम्मेदमल पांड्या, दिल्ली नवम्बर १९९२ से नवम्बर २००१ तक
    • उपाध्यक्ष कालावधि
      १७. स्व.श्री शरदकुमार जैन, मुंबई फरवरी,१९९५ से २००८ तक
      १८. श्री शिखरचन्द पहािड़या, मुंबई २३ जुलाई, २००८ से अक्टूबर १३ तक
      १९. श्रीमती सरिता जैन, चेन्नई २३ जुलाई, २००८ से अक्टूबर १३ तक
      २०. श्री वसंतलाल एम. दोशी, मुंबई २३ जुलाई, २००८ से अक्टूबर १३ तक
      २१. श्री गणेशकुमार राणा, जयपुर २३ जुलाई, २००८ से अक्टूबर १३ तक
    • उपाध्यक्ष कालावधि
      २२. श्री महावीर प्रसाद सेठी, सरिया २३ जुलाई, २००८ से ९ जुलाई १६ तक
      २३. श्रीमती सरिता एम.जैन, चैन्नई अक्टूबर २०१३ से २५ फरवरी १६ तक
      २४. श्री हुकम हरकचंद जैन काका, कोटा ११ दि. २०१६ से १५.२०१८ तक
      २५. श्री नीलम चंपराय अजमेरा, उस्मानाबाद २० अक्टूबर २०१३ से १५दिसम्बर २०१८
      २६. श्री वसंतलाल एम.दोशी, मुम्बई २० अक्टूबर २०१३ से आज तक
    • उपाध्यक्ष कालावधि
      २७. श्री प्रदीप नेमीचंद जैन, पी.एन.सी, आगरा २० अक्टूबर २०१३ से आज तक
      २८. श्री पंकज जैन, दिल्ली २५ फरवरी २०१६ से १५ दि.२०१८ तक
      २९. श्री शिखरचन्द पहािड़या, मुम्बई १५ दिसम्बर २०१८ से आज तक
      ३०. श्री गजराज गंगवाल, दिल्ली १५ दिसम्बर २०१८ से आज तक
      ३१. श्री तरुण काला, मुम्बई १५ दिसम्बर २०१८ से आज तक
    • कोषाध्यक्ष कालावधि
      १. स्व.श्री सेठ गुरुमुखराय सुखानन्दजी, मुंबई १९०६ से १९३१ तक
      २. स्व.ठाकोरदास पानाचंद जवेरी, मुंबई १९४३ से १९६२ तक
      ३. स्व. साहू श्री श्रेयांसप्रसाद जैन, मुंबई १९६४ से १९८३ तक
      ४. स्व. श्री धनकुमार ठाकोरदास जवेरी, मुंबई १९८३ से जुलाई २००२ तक
      ५. श्री जम्बूकुमारसिंह कासलीवाल, मुंबई मई २००३ से जून २००८ तक
      ६. श्री प्रभातचन्द्र सवाईलाल जैन, मुंबई २३ जुलाई, २००८ से २५ अक्टूबर २०१३ तक
    • कोषाध्यक्ष कालावधि
      ७. श्री शिखरचंद पहािड़या, मुम्बई २० अक्टूबर २०१३ से १५ दिसम्बर २०१८
      ८. श्री के.सी.जैन, सी.ए., मुम्बई १५ दिसम्बर २०१८ से आज तक
      महामंत्री कालावधि
      १. श्री स्व.सेठ माणिकचंदजी जवेरी, मुंबई १९०६ से १९१३ तक
      २. श्री स्व.लाला भागमल प्रभुदयालजी, मुंबई १९१४ से १९१७ तक
      ३. स्व.श्री तीर्थभक्त रतनचंद चुनीलाल जवेरी १९२० से १९६३ तक
    • महामंत्री कालावधि
      ४. स्व.श्री चन्दूलाल कस्तूरचंद जी १९६४ से १९७६ तक
      ५. स्व.श्री जयंतीलाल एल. परिख, मुंबई १९७६ से १९७८ तक
      ६. स्व.श्री जयचन्द डी. लोहाड़े, हैदराबाद १९७८ से नवम्बर १९९२ तक
      ७. श्री अरविन्द रावजी दोशी, मुंबई नवम्बर १९९२ से जून २००८ तक
      ८. श्री चk्रÀेश जैन, नई दिल्ली जुलाई, २००८ से २५ अक्टूबर १३ तक
    • महामंत्री कालावधि
      ९. श्री पंकज जैन, दिल्ली २५ अक्टूबर १३ से २५ फरवरी १८तक
      १०. श्री संतोष जैन पेंढारी, नागपुर २५ फरवरी २०१६ से १५ दि. २०१८ तक
      ११. श्री राजेन्द्र के. गोधा, जयपुर १५ दिसम्बर २०१८ से आज तक
      मंत्री कालावधि
      १. स्व. सेठ लल्लूभाई लखमीचन्दजी चौकसी, मुम्बई सन् १९०६ से १९२३ तक
      २. स्व. श्री बा. रघुनाथदास जी, सरनाँ सन् १९०६ से १९२३ तक
    • मंत्री कालावधि
      ३. स्व. श्री ठाकरसी निहालचन्द जी, मुम्बई सन् १९०६ से १९२३ तक
      ४. स्व. बा. बलदेवदासजी, कलकता सन् १९०६ से १९२३ तक
      ५. स्व. सेठ ठाकोरभाईजी जवेरी, मुम्बई १९४३ से १९६२ तक
      ६. स्व. श्री जयंतीलाल लल्ल्ाूभाईजी परिख, मुम्बई १९५२ से १९७८ तक
      ७. स्व. श्री चिमनलाल गोपालदास जी बखारिया १९५२ से ….
    • मंत्री कालावधि
      ८. स्व. सेठ चन्दूलाल कस्तूरचंद जी शाह, मुम्बई १९६४ से १९८३ तक
      ९. स्व. धनकुमार ठाकोरदासजी जवेरी, मुम्बई १९६४ से १९८३ तक
      १०. स्व. श्री रावसाहेब जिवराजजी शाह, मुम्बई १९७८ से १९९२ तक
      ११. स्व. श्री सी.जे.बंडी एडवोकेट, मुम्बई १९८२ से नवम्बर १९९२ तक
      १२. स्व. श्री रमेशचंदजी जैन (पी.एन.मोटर्स), नई दिल्ली १९८७ से नवम्बर, १९९२ तक
    • मंत्री कालावधि
      १३. स्व. श्री जम्बूकुमारसिंहजी कासलीवाल, मुम्बई १९७८ से मई २००५ तक
      १४. श्री वसंतलाल एम.दोशी, मुम्बई नवम्बर १९९२ से जून २००८ तक
      १५. श्री भागचन्द जी जैन, कोलकाता मई २००३ से जून २००८ तक
      १६. श्रीमति सरिता जैन, चैन्नई मई २००३ से जून २००८ तक
      १७. श्री शरद जैन, भोपाल मई २००३ से जून २००८ तक
    • मंत्री कालावधि
      १८. श्री सुरेश जैन (आई.ए.एस), भोपाल जुलाई २००८ से अक्टूबर २०१३ तक
      १९. श्री वी.के.जैन, दिल्ली जुलाई,२००८ से अक्टूबर २०१३ तक
      २०. श्री मनोज जैन, धनबाद जुलाई,२००८ से अक्टूबर २०१३ तक
      २१. श्री संतोष जैन पेंढारी, नागपुर २० अक्टूबर २०१३ से २५ फरवरी २०१६ तक
      २२. श्री विनोदकुमार बाकलीवाल, मैसूर
    • मंत्री कालावधि
      २३. श्री खुशाल जैन सी.ए., मुम्बई २० अक्टूबर २०१३ से आज तक
      २४. श्री शरद जैन, भोपाल २० अक्टूबर २०१३ से १५ दि.१८ तक
      २५. श्री वीरेश सेठ, जबलपुर २५ फरवरी २०१६ से १५ दि.१८ तक
      २६. श्री नीलम जैन अजमेरा, उस्मानाबाद १५ दिसम्बर २०१८ से आज तक
      २७. श्री विनोद जैन बड़जात्या, रायपुर १५ दिसम्बर २०१८ से आज तक
      २८. श्री जयकुमार जैन (कोटावाले) जयपुर १५ दिसम्बर २०१८ से आज तक

      सम्मेदाचल का विकास

      साहू शांति प्रसाद जी के कार्यकाल में ही शिखरजी क्षेत्र पर श्वेताम्बर भाईयों के साथ हमारा उग्रतम विवाद चला । उस संकटकाल में श्रीमान् साहूजी की सूझ-बूझ, प्रभाव, धीरज तथा उदारता कमेटी के लिए और समस्त दिगम्बर जैन समाज के लिए, देवी वरदान की तरह महत्वपूर्ण सिद्ध हुए। उस समय श्वेताम्बरों ने अनेक प्रकार के प्रभाव डालकर, बिहार शासन के साथ, पवित्र सम्मेदाचल पर्वत के संबंध में एकपक्षीय अनुबंध (एग्रीमेन्ट) कर लिया था । साहू शांतिप्रसाद जी ने इसका शक्त विरोध किया।

      Jackson Franco for US

      Ideological Leader ForYouth Generation

      Phasellus finibus ut felis sed suscipit. Donec gravida vel libero ac eleifend. Nullam in justo mattis libero pharetra aliquet nec eget sem. Pellentesque ullamcorper ullamcorper est quis tincidunt. Nullam ut fringilla velit. Nam quis orci ac leo lacinia accumsan quis non dui