यहाँ भगवान शान्तिनाथ का एक विशाल मंदिर है, जिसमें मूलनायक भगवान शांतिनाथ की 12 फुट ऊँची अत्यन्त सौम्य खड्गासन प्रतिमा है। ऐसा माना जाता है कि यह मंदिर एक प्राचीन शांतिनाथ भगवान के मंदिर जिसका निर्माण सन् 1046 में हुआ …
Continue Readingक्षेत्र पर स्थित 8 जिन मन्दिरों में 13वीं एवं 14वीं शताब्दी की मनोज्ञ प्रतिमाएँ एवं 3 नवीन जिनालय है। विद्धानों के मतानुसार यहाँ चेलना नदी के किनारे पावा की पहाड़ी से श्री स्वर्णभद्र आदि मुनि मोक्ष गये। पहाड़ी के शिखर …
Continue Readingलगभग 2900 वर्ष प्राचीन यह महान तीर्थ क्षेत्र भगवान पार्श्वनाथ की समवशरणभूमि है साथ ही वीतरागी साधुओं की तपोभूमि और उनके निर्वाण स्थल होने से यहाँ का कण-कण वंदनीय है। इस तपोभूमि से मुनिन्द्रदत्त, इन्द्रदत्त, वरदत्त,गुणदत्त, और सायरदत्त पंचमुनि राजों …
Continue Readingबुन्देलखण्ड क्षेत्र में स्थित इस अहारग्राम में भगवान मल्लिनाथ के तीर्थकाल में सत्रहवें कामदेव मदनकुमार (नलराज) एवं महावीर स्वामी के तीर्थकाल में आठवें केवली बिस्कवल ने तपस्या कर मोक्ष प्राप्त किया। कहा जाता है कि प्राचीन काल में यहां लगभग …
Continue Readingबुन्देलखण्ड के इस महत्वपूर्ण तीर्थक्षेत्र में स्थित इस मंदिर के दो भाग है आगे वाला भाग बड़ा मंदिर कहलाता है, पीछे भाग में चौबीसी है बड़ा मंदिर अधिक प्राचीन है इसके एक स्तम्भ पर सं. 1350 का शिलालेख है इस …
Continue Readingप्राचीन रेवा नदी (नर्मदा नदी) के तट पर स्थित सिद्ध क्षेत्र नेमावर एवं इसके आसपास के क्षेत्र में अनादिकाल के अनेक विशालकाय पुरातत्वीय अवशेष मौजूद है।रावण के पुत्र सहित साढ़े पाँच करोड़ मुनिराज इस स्थली से मोक्ष पधारे है।यहाँ नर्मदा …
Continue Readingमध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले में पपौरा जी से 25 कि.मी. पूर्व में कल-कल करती सरिता धसान नदी‘ के तट पर है। यह क्षेत्र विन्ध्यांचल पर्वत श्रृंखला की कोटिशिला पर स्थित है। यह क्षेत्र प्राचीनतम तपस्या स्थली एवं निर्वाण स्थली है। …
Continue Readingनवोदित अतिशययुक्त इस तीर्थक्षेत्र पर आकर्षक पंच पहाडी पर 24 फुट ऊँचाई पर कमलासन भगवान महावीर स्वामी की 15 फुट की पद्मासन प्रतिमा, वासुपूज्य भगवान, मल्लिनाथ भगवान, नेमिनाथ और पार्श्वनाथ भगवान की पद्मासन प्रतिमाएं विराजमान है। इन वेदियों के दोनों …
Continue Readingयह क्षेत्र सोलापुर-हैदराबाद हाइवे पर सोलापुर से आगे मुरूम मोड़ से 9 कि.मी. अन्दर है। यहां श्री पार्श्वनाथ की अतिशययुक्त प्रतिमा विराजमान है।देश भर में दूरदूर तक स्थित अपने दिगम्बर जैन तीर्थयों की सेवा-सम्हाल करके उन्हें एक संयोजित व्यवस्था के …
Continue Readingमहाभारत कालीन ऐतिहासिक विराट नगरी जयपुर से 85 कि.मी. की दूरी पर राजमार्ग संख्या 13 पर स्थित अरावली पर्वत के नैसर्गिक सौन्दर्य से घिरी यह प्राचीन नगरी जैन, बौद्ध, सनातन सभी धर्मो की धरोहर को अपने में समेटे हुए है। …
Continue Reading