ऐतिहासिक ‘श्री विद्या समय शिखरजी यात्रा २०२६’ भव्य रूप से संपन्न
१०३९ श्रद्धालुओं ने किया सिद्धक्षेत्र श्री सम्मेद शिखरजी का पावन वंदना
युगपुरुष, संत शिरोमणि परम पूज्य आचार्य श्री १०८ विद्यासागर जी महाराज के द्वितीय समाधि दिवस के पावन उपलक्ष्य में ‘विद्या समय संस्कार सेवा फाउंडेशन, मुंबई’ के तत्वावधान में आयोजित ‘श्री विद्या समय शिखरजी यात्रा २०२६’ २२ फरवरी २०२६ को सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
यह ऐतिहासिक यात्रा १५ फरवरी २०२६ को लोकमान्य तिलक टर्मिनस से विशेष रेलगाड़ी (संख्या ००१३९) द्वारा प्रारंभ हुई थी। यात्रा का उद्देश्य उन सहस्रों श्रावकों को शाश्वत सिद्धक्षेत्र श्री सम्मेद शिखरजी की वंदना कराना था, जो अब तक इस निर्वाण-भूमि के दर्शन से वंचित थे।
१०२१ श्रद्धालुओं ने पूर्ण की निर्विघ्न वंदना- १०३९ तीर्थयात्रियों के विशाल संघ में से १०२१ श्रद्धालुओं ने पर्वतराज की पूर्ण वंदना की। इनमें ९०० से अधिक श्रद्धालु ऐसे थे, जिन्हें जीवन में पहली बार शिखरजी की पावन माटी का स्पर्श करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। यात्रा में १ दृष्टिहीन किशोर, २ मूकबधिर वरिष्ठ नागरिक, १ मूकबधिर बालिका एवं लगभग १० गंभीर रोगों से ग्रसित श्रद्धालुओं ने अदम्य आस्था और संकल्प के साथ पूर्ण वंदना कर प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। विशेष उल्लेखनीय तथ्य यह रहा कि १०० से अधिक व्रती श्रावक इस यात्रा में सम्मिलित हुए, जिनमें ९० प्रतिशत ६० से ९० वर्ष आयु वर्ग के वरिष्ठ नागरिक थे। सभी व्रती श्रावकों की संपूर्ण यात्रा के दौरान शुद्ध दिनचर्या का पूर्ण निर्वाह सुनिश्चित किया गया।
पूज्य संतों का मंगल आशीर्वाद 
यह संपूर्ण यात्रा परम पूज्य
आचार्य श्री १०८ समयसागर जी महाराज,
आचार्य श्री १०८ वसुनंदी जी महाराज,
आचार्य श्री १०८ सुनील सागर जी महाराज,
मुनिश्री १०८ सुधासागर जी महाराज,
मुनिश्री १०८ प्रमाणसागर जी महाराज,
मुनिश्री १०८ नियमसागर जी महाराज,
मुनिश्री १०८ संभवसागर जी महाराज,
गणिनी प्रमुख आर्यिका श्री १०५ ज्ञानमती माताजी एवं
आर्यिका श्री १०५ पूर्णमती माताजी
के मंगल आशीर्वाद से निर्विघ्न संपन्न हुई।
सिद्धक्षेत्र में ४० माताजी के विशाल संघ का पावन सान्निध्य भी प्राप्त हुआ।
आध्यात्मिक आयोजन – ‘आचार्य छत्तीसी विधान’
गुरुदेव के समाधि दिवस पर बा. ब्र. तात्या भैया के निर्देशन में एवं विधानाचार्य अंकित भैया द्वारा संगीतमय ‘आचार्य छत्तीसी विधान’ संपन्न हुआ। संगीतमय वातावरण ने संपूर्ण यात्रा को गुरु-भक्ति और अध्यात्म से सराबोर कर दिया।
उत्कृष्ट प्रबंधन और सेवा भावना
३५ समर्पित कार्यकर्ताओं की टीम ने रेलगाड़ी से लेकर पर्वत की चोटी तक प्रत्येक यात्री की सुविधा सुनिश्चित की। ६ विशेषज्ञ चिकित्सकों के दल ने चौबीसों घंटे सेवाएँ प्रदान कीं।
भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम, रेलवे बोर्ड, सिद्धायतन धर्मशाला एवं शाश्वत ट्रस्ट द्वारा उत्कृष्ट भोजन एवं आवास व्यवस्था उपलब्ध कराई गई।
सेवा का सम्मान
शांति विद्या धर्म संवर्धनी संस्था के प्रमुख बा. ब्र. तात्या भैयाजी ने मुख्य संयोजक किरीट दोशी, निदेशक मनीष जैन (सीए), राजेंद्र सेठी (सीए) एवं सहयोगियों को सम्मान पत्र एवं अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया।
गुप्त दानदाता परिवार का अनुकरणीय त्याग
इस ऐतिहासिक धर्म प्रभावना के मूल आधार एक श्रद्धेय गुप्त दानदाता श्रावक श्रेष्ठी परिवार रहे, जिन्होंने विराट दान देकर भी अपना नाम गुप्त रखा। उनका यह त्याग आत्म-विशुद्धि और निस्वार्थ सेवा का अनुपम उदाहरण है।
‘श्री विद्या समय शिखरजी यात्रा २०२६’ केवल एक तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण, वात्सल्य और गुरु-भक्ति का जीवंत उत्सव सिद्ध हुई।विद्या समय संस्कार सेवा फाउंडेशन ने इस सफल आयोजन हेतु सभी प्रत्यक्ष एवं परोक्ष सहयोगियों के प्रति हृदय से कृतज्ञता व्यक्त की है।


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