नैनागिरि (रेशंदीगिरि)

नाम एवं पता

श्री 1008 दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र - नैनागिरि (रेशंदीगिरि)

श्री 1008 दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र – नैनागिरि (रेशंदीगिरि) ग्राम – नैनागिरि,
तहसील – बिजावर (सब तहसील – बकस्बाहा) जिला – छतरपुर (म.प्र.),
पिन – 471318 फोन नं. – 07583-280095 (का.) 280028 (नि.)

नाम एवं पता

श्री 1008 दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र - अहार जी

श्री दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र – अहारजी तहसील – बलदेवगढ़, जिला – टीकमगढ़ (म.प्र.)
पिन – 472001 फोन नं. – 07683-224474

नैनागिरि (रेशंदीगिरि)

क्षेत्र का महत्व एवं ऐतिहासिकता

लगभग 2900 वर्ष प्राचीन यह महान तीर्थ क्षेत्र भगवान पार्श्वनाथ की समवशरणभूमि है साथ ही वीतरागी साधुओं की तपोभूमि और उनके निर्वाण स्थल होने से यहाँ का कण-कण वंदनीय है। इस तपोभूमि से मुनिन्द्रदत्त, इन्द्रदत्त, वरदत्त,गुणदत्त, और सायरदत्त पंचमुनि राजों ने उग्र तपश्चरण कर मोक्ष प्राप्त किया था।क्षेत्र पर 53 जिनालय है जिनमें 38 मंदिर पहाडी पर 13 मंदिर तलहटी पर एवं 2 मंदिर पारस सरोवर में स्थित है। चौबीसी जिनालय में भगवान पार्श्वनाथ की शास्त्र प्रमाण अवगाहन के बराबर आकार की खड्गासन प्रतिमा संभवतः सम्पूर्ण जैन तीर्थो में एक मात्र इस आकार की प्रतिमा है। इस महान क्षेत्र के प्रकाश में आने की कथा भी बहुत रोचक है। बम्हौरी के व्याश्री श्यामले जी को आये स्वप्न के अनुसार खुदाई करने पर 13 जिन प्रतिमाओं से युक्त मंदिर प्राप्त हुआ था। क्षेत्र पर सर्वाधिक प्राचीन जिनालय (संवत 1109 ई.) सन 1042 का है। पर्वतराज के ठीक दक्षिण में लगभग दो कि.मी. दूर एक अकृत्रिम सुन्दर और आध्यात्मिक आभायुक्त, विशाल सिद्धशाला है। जो पंच ऋषिराजों की तपस्या स्थली रही है। इन्द्रवन में 6 आचार्यो के चरण पादुका प्रतिष्ठित है। मंदिर क्र. 35 में विराजमान भगवान महावीर स्वामी का अभिषेक एवं प्रक्षाल के समय ओंकार ध्वनि सुनाई देती है जो एक विशेष अतिशय है।

उपलब्ध सुविधाएं

श्री 1008 दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र

क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ

आवास (मय स्नानगृह) – 30, (बिना स्नानगृह) – 80, हाल – 7 (यात्री क्षमता – 350), यात्री ठहराने की कुल क्षमता – 1000, भोजनशाला – नियमित, सशुल्क पुस्तकालय – उपलब्ध – पुस्तके – 6000,एवं नियमित पत्रिकायें , – 5, विद्यालय – उपलब्ध वृती/वृद्धाश्रम)।

आवागमन के साधन

रेल्वे स्टेशन – सागर – 55 कि.मी.।,
बस स्टैण्ड – दलपतपुर – 13 कि.मी., पहुँचने का सरलतम मार्ग – सागर टीकमगढ़ छतरपुर से सड़क मार्ग। सागर- बकस्वाहा राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. 86 पर स्थित दलपतपुर ग्राम से 13 कि.मी.।

समीपस्थ तीर्थ क्षेत्र

द्रोणगिरि – 80 कि.मी.,पपौरा जी – 102 कि.मी.,अहार जी – 115 कि.मी.,कुण्डलपुर – 120 कि.मी.,खजुराहो – 168 कि.मी.

प्रबन्ध व्यवस्था

संस्था – श्री दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र रेशन्दी नैनागिरि प्रबन्ध समिति
अध्यक्ष – श्री महेन्द्रकुमार मलैया, सागर (07582-244277)।
श्री रघुवर प्रसाद डेवडिया, शाहगढ़ (07583-259337)
मंत्री – राजेश ‘‘रागी‘‘ बकस्वाहा (254319)
कोषाध्यक्ष – डॉ.. पूर्णचंद जैन, बण्डा (07583-252368)

तीर्थक्षेत्र की वेबसाइट
भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी
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धर्मशाला आरक्षित करें
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क्षेत्र पर उपलब्ध सुविधाएँ

आवास (मय स्नानगृह) - 30, बिना स्नानगृह - 80, हाल - 7 (यात्री क्षमता - 350), यात्री ठहराने की कुल क्षमता - 1000, भोजनशाला - नियमित, सशुल्क ; पुस्तकालय - उपलब्ध - पुस्तके - 6000, एवं नियमित पत्रिकायें - 5, विद्यालय - उपलब्ध वृती/वृद्धाश्रम

आवागमन के साधन

रेल्वे स्टेशन - सागर - 55 कि.मी.। बस स्टैण्ड - दलपतपुर - 13 कि.मी., कटनी दमोह से होकर व्हाया बकस्वाहा - 25 कि.मी., शाहगढ़ - 40 कि.मी.। पहुँचने का सरलतम मार्ग - सागर टीकमगढ़ छतरपुर से सड़क मार्ग। सागर- बकस्वाहा राष्ट्रीय राजमार्ग क्र. 86 पर स्थित दलपतपुर ग्राम से 13 कि.मी.।

समीपस्थ तीर्थ क्षेत्र

द्रोणगिरि - 80 कि.मी., पपौरा जी - 102 कि.मी., अहार जी - 115 कि.मी., कुण्डलपुर - 120 कि.मी., खजुराहो - 168 कि.मी.।

प्रबन्ध व्यवस्था

संस्था - श्री दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र रेशन्दी नैनागिरि प्रबन्ध समिति अध्यक्ष - श्री महेन्द्रकुमार मलैया, सागर (07582-244277) श्री रघुवर प्रसाद डेवडिया, शाहगढ़ (07583-259337) मंत्री - राजेश ‘‘रागी‘‘ बकस्वाहा (254319) कोषाध्यक्ष - डॉ.. पूर्णचंद जैन, बण्डा (07583-252368)

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    निकटतम प्रमुख नगर:दलपतपुर - 13 कि.मी., बकस्वाहा - 26 कि.मी., बण्डा (वेलई) - 25 कि.मी.,
    शाहगढ़ - 40 कि.मी.।
    मेला एवं उत्सव: अगहन शुक्ल तेरस से पूर्णिमा तक वार्षिक मेला लगता है। इसके अलावा वर्ष में दो दिन विशेष कार्यक्रम होते है - सावन सुदी 7 श्री पार्श्वनाथ निर्वाण दिवस, कार्तिक वदी अमावस - भगवान महावीर निर्वाण दिवस ।

    भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी

    भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी का इतिहास

    देश भर में दूरदूर तक स्थित अपने दिगम्बर जैन तीर्थयों की सेवा-सम्हाल करके उन्हें एक संयोजित व्यवस्था के अंतर्गत लाने के लिए किसी संगठन की आवश्यकता है , यह विचार उन्नीसवीं शताब्दी समाप्त होने के पूर्वसन् 1899 ई. में, मुंबई निवासी दानवीर, जैन कुलभूषण, तीर्थ भक्त, सेठ माणिकचंद हिराचंद जवेरी के मन में सबसे पहले उदित हुआ ।

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