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बारहवें तीर्थकर भगवान वासुपूज्य की निर्वाण भूमि (मंदारपर्वत) पर चढ़ाया गया निर्वाण लाड़ू
क्षमावाणी के पावन अवसर पर बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने किया रोपवे का उद्घाटन…
मंदारगिरि (बांका/बिहार) :- बारहवें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी की तप, ज्ञान एवं मोक्ष कल्याणक भूमि श्री मंदारगिरी जी दिगम्बर जैन सिद्धक्षेत्र (मन्दारपर्वत), बौंसी, जिला – बांका (बिहार) में दिनांक – 19/09/2021 अनंत चतुर्दशी के दिन मोक्ष कल्याणक के अवसर पर निर्वाण लाड़ू चढ़ाया गया तथा 21/09/2021 क्षमावाणी के पावन अवसर पर जैन धर्मावलंबियों को बिहार सरकार की ओर से 700 फिट लंबे रोपवे का सौगात मिला। तीन धर्मो का संगम कहे जाने वाले इस पर्वत पर रोपवे के निर्माण से वृद्धजनों को यात्रा करने में काफी सुविधा मिलेगी।
बिहार स्टेट दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के मानद मंत्री श्री पराग जी जैन ने मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार जी से रोपवे के उद्घाटन के क्रम में तीर्थ विकास हेतु निवेदन किया जिसे मुख्यमंत्री ने ध्यानपूर्वक सुनते हुए काफी उत्साहित दिखे। तथा बिहार स्टेट दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के मानद मंत्री श्री पराग जैन एवं प्रबंध कमिटी की ओर से मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र तथा मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।
सिद्धक्षेत्र के दर्शन कर आह्लादित हुए मुख्यमंत्री भगवान वासुपूज्य स्वामी की तप, ज्ञान एवं मोक्ष भूमि के दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जिनमंदिर की प्राचीनता तथा प्राकृतिक सौंदर्य की काफी तारीफ की।
बिहार राज्य में राजगृह जी के बाद यह दूसरा रोपवे मन्दारपर्वत पर बनाया गया। रोपवे के निर्माण से पंचतीर्थ की यात्रा को आने वाले जैन तीर्थयात्री आगे की वंदना करने में भी समय की काफी बचत कर पायेंगे। जानकारी साझा करते हुए श्री पराग जैन ने बताया कि कमेटी की ओर से मोक्ष कल्याण मन्दिर के परिसर में चार कमरों का जीर्णोद्धार यात्रियों के सुविधा हेतु कराया गया है। पैदल यात्रा करने वाले यात्री इसका लाभ ले पायेंगे तथा मंदिर के सुरक्षा की दृष्टि से भी कमरों का निर्माण होना अति आवश्यक था।
इस कार्यक्रम को महीनों पहले से सफलतापूर्वक संपन्न कराने में प्रबंधक कमल जैन, संजीव जैन, श्रीकांत जैन तथा कुण्डलपुर के प्रबंधक जगदीश जैन, बैजनाथ, मनोज जैन की अहम भूमिका रही। उक्त जानकारी रवि कुमार जैन – राजगीर/पटना ने दी |

भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी
www.tirthkshetracommittee.com
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देश भर में दूरदूर तक स्थित अपने दिगम्बर जैन तीर्थयों की सेवा-सम्हाल करके उन्हें एक संयोजित व्यवस्था के अंतर्गत लाने के लिए किसी संगठन की आवश्यकता है , यह विचार उन्नीसवीं शताब्दी समाप्त होने के पूर्वसन् 1899 ई. में, मुंबई निवासी दानवीर, जैन कुलभूषण, तीर्थ भक्त, सेठ माणिकचंद हिराचंद जवेरी के मन में सबसे पहले उदित हुआ ।
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