बुन्देलखण्ड के इस महत्वपूर्ण तीर्थक्षेत्र में स्थित इस मंदिर के दो भाग है आगे वाला भाग बड़ा मंदिर कहलाता है, पीछे भाग में चौबीसी है बड़ा मंदिर अधिक प्राचीन है इसके एक स्तम्भ पर सं. 1350 का शिलालेख है इस …
Continue Readingकागदीपुरा (नालछा) में प्रागैतिहासिक काल से मुगलकाल तक के खण्डहरों के अवशेष विद्यमान है। प्राचीनतम अवशेषों के रूप में जैन तीर्थंकर नेमिनाथ की छठी शताब्दी की पद्मासन प्रतिमा ध्यानस्थ मुद्रा में है। यहां सन् 2007 मे खुदाई में भगवान आदिनाथ …
Continue Readingक्षेत्र में दो दिगम्बर जैन मन्दिर है। सातवें तीर्थंकर भगवान सुपार्श्वनाथ की गर्भ,जन्म, तप एवं ज्ञान कल्याणक स्थली।वाराणसी के सुरम्य गंगा तट पर श्री प्रभुदास जैन घाट पर स्थित श्री स्यादवाद महाविद्यालय एवं श्री अकलंक सरस्वती पुस्तकालय एवं छात्रावास भी …
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Continue Readingमहाभारत कालीन ऐतिहासिक विराट नगरी जयपुर से 85 कि.मी. की दूरी पर राजमार्ग संख्या 13 पर स्थित अरावली पर्वत के नैसर्गिक सौन्दर्य से घिरी यह प्राचीन नगरी जैन, बौद्ध, सनातन सभी धर्मो की धरोहर को अपने में समेटे हुए है। …
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