तारंगा जी सिद्धक्षेत्र गुजरात के मध्य में विद्यासागरजी तपोवन स्थित है यहाँ आचार्य श्री 108 विद्यासागरजी महाराज पधारे थे। 1996 में इसकी स्थापना की गयी थी। यहाँ एक भव्य सिंह द्वार तथा क्षेत्र के इष्ट एवं आराध्या देव मूल नायक …
Continue Readingतारंगा क्षेत्र उत्तर गुजरात के मेहसाणा जिले में अरावली पर्वत मालाओं की एक मनोरम टेकरी पर स्थित है। यह एक प्रसिद्ध सिद्ध क्षेत्र है। यहां से वरदत्त, वरांग,सागरदत्त, आदि साढे तीन करोड मुनियों ने निर्वाण प्राप्त किया था। इस नगर …
Continue Readingसिद्ध क्षेत्र ऊन पावागिरि की खोज वीर निर्माण संवत् 2440 ईसवी सन् 1914 के लगभग हुई थी। यह स्वर्णभद्र मुनि की मोक्षस्थली है। यहाँ भगवान महावीर की 3 फीट ऊँची पदमासन प्रतिमा क्षेत्र के पुजारी श्री चेतनलाल जैन को स्वप्न …
Continue Readingविन्ध्याँचल पर्वत की भांडेर पर्वत श्रेणियों में प्राकृतिक छटा युक्त कुण्डगिरि पहाडी पर तथा नीचे घाटी में 63 जिनालय है। पहाड़ी के मध्य बड़े बाबा का मन्दिर है,जिसमें भगवान आदिनाथ ‘‘बड़े बाबा’’ की 15 फुट ऊँची पद्मासन प्रतिमा 5वीं-6ठीं सदी …
Continue Readingप्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण एवं सुरम्य पहाडियों की तलहटी में पलाश एवं घने वृक्षों की छाया में घिरे एवं आज पूरी तरह खण्डहरों का गाँव बन चुके दिगम्बर जैनअतिशय क्षेत्र बजरंगगढ़ में किले के नीचे नदी के तट पर पाडाशाह …
Continue Readingपावागढ़ का प्राचीन नाम पावागिरि था, बाद में पर्वत पर दुर्ग बन जाने के कारण इसका नाम पावागढ़ हो गया। यह स्थान सिद्धक्षेत्र या निर्वाण क्षेत्र है। यहाँ पर श्री रामचन्द्र के दो पुत्रों - अनंगलवण और मदनांकुश (लव और …
Continue Readingगिरनार पर्वत सुप्रसिद्ध तीर्थ क्षेत्र है। क्षेत्र पर बाइसवें तीर्थंकर अरिष्टनेमि (नेमिनाथ) के दीक्षा, केवल ज्ञान और निर्वाण हुए है, इसीलिये यह क्षेत्र कल्याणक क्षेत्र एवं तीर्थराज सिद्धक्षेत्र कहलाता है।गिरनार पर्वत के उपर पांच टोकंे है जिनमें राजुल गुफा, अनिरूद्ध …
Continue Readingशंत्रुजय पर्वत निर्वाण क्षेत्र है। इस स्थान से युधिष्ठर, भीम और अर्जुन तीन पाण्डव तथा आठ करोड द्रविड़ राजा मुनि मोक्ष को गये है। पालीताणा शहर से गिरि की तलहटी एक मील दूर है। पालीताणा शहर में एक दिगम्बर जैन …
Continue Readingद्रोणगिरि पर्वत से गुरूदत्त मुनि के साथ साढे आठ करोड मुनियों ने निर्वाण प्राप्त किया है। पर्वत पर जाने के लिये 170 सीढियां बनी हुई है। पर्वत पर 38 जिनालय एवं तीन गुफाएँ है। पर्वत के पास ही दो कुण्ड …
Continue Readingइस क्षेत्र पर भगवान महावीर की 11.25 फीट ऊँची खड्गासन 9 टन पीतल की विश्व की प्रथम मूर्ति है यह मूर्ति अति मनोहारी एवं चमत्कारिक है। मन्दिर के शिखर की ऊॅचाई भूतल से 111 फीट है। क्षेत्र पर भगवान पार्श्वनाथ …
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