भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के सतत प्रयासों से पुरातत्व विभाग के कमिश्नर ने दिनांक २७-०७-२०२१ को कोनकोंडला क्षेत्र के विकास के लिए तीर्थक्षेत्र कमेटी को अनुमति प्रदान कर दी है। कोनाकुंडला के जैन तीर्थक्षेत्र की ४२.७९ एकड़ भूमि भारतवर्षीय …
Continue Readingयहाँ बीसवें तीर्थंकर मुनि सुव्रतनाथजी के गर्भ, जन्म, तप एवं ज्ञान कल्याणक हुए थे। यह भगवान महावीर स्वामी की प्रथम देशना स्थली है। यहाँ उनके 14 चातुर्मास हुए थे। भगवान महावीर का धर्मचक्र पर्वत प्रवर्तन क्षेत्र भी यही है। यहाँ …
Continue Readingयमुना तटीय यह क्षेत्र बाइसवें तीर्थंकर भगवान श्री नेमिनाथ की गर्भ एवं जन्म कल्याणक भूमि है। सहस्त्रों वर्ष पूर्व धन-धान्य से परिपूर्ण इस समृद्ध नगरी को महाराज शूरसेन ने बसाया था। उन्हीं के वंशज महाराज समुद्र विजय के सबसे छोटे …
Continue Readingदक्षिण भारत का सम्मेदशिखर कहलाने वाला यह तीर्थक्षेत्र राम, हनुमान, सुग्रीव,गवय, गवाक्ष, नील, महानील आदि 99 करोड़ मुनियों की मोक्ष स्थली है। समुद्र तल से 4500 फीट ऊँचाई पर गालना हिल नाम से प्रसिद्ध इस पहाड़ी क्षेत्र की दो चोटियाँ …
Continue Readingयह क्षेत्र भगवान महावीर स्वामी के गणधर इन्द्रभूति गौतम स्वामी का निर्वाण क्षेत्र है। यहां एक सरोवर में भव्य जिन मन्दिर बना हुआ है। इस मन्दिर में एक वेदी में गौतम स्वामी के चरण तथा दूसरी वेदी में भगवान पार्श्वनाथ …
Continue Readingकर्नाटक के बेल्लारी जिला, सिरुगुप्पा तालुका के बालकुंडी (बालाकुंड) गांव पहले जैनों का प्रसिद्ध स्थान था| गत दिनों पहले पहाड़ के पीछे खेत में जेसीबी से चल रही खुदाई के समय 5 काले पत्थर मिले हैं जिसके ऊपर मूर्तियाँ बनी …
Continue Readingयहाँ बीसवें तीर्थंकर मुनि सुव्रतनाथजी के गर्भ, जन्म, तप एवं ज्ञान कल्याणक हुए थे। यह भगवान महावीर स्वामी की प्रथम देशना स्थली है। यहाँ उनके 14 चातुर्मास हुए थे। भगवान महावीर का धर्मचक्र पर्वत प्रवर्तन क्षेत्र भी यही है। यहाँ …
Continue Readingदक्षिण भारत का सम्मेदशिखर कहलाने वाला यह तीर्थक्षेत्र राम, हनुमान, सुग्रीव,गवय, गवाक्ष, नील, महानील आदि 99 करोड़ मुनियों की मोक्ष स्थली है। समुद्र तल से 4500 फीट ऊँचाई पर गालना हिल नाम से प्रसिद्ध इस पहाड़ी क्षेत्र की दो चोटियाँ …
Continue Readingबारहवें तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी के तप, ज्ञान एवं निर्वाण कल्याणक यहाँ हुए थे। माना जाता है भगवान् वासुपूज्य के एक गणधर मन्दर को यहीं पर निर्वाण प्राप्त हुआ था। पर्वत की चोटी पर भगवान तप, ज्ञान और मोक्ष कल्याणक …
Continue Readingदेश के सर्वाधिक दक्षिण में स्थित यह सिद्ध क्षेत्र कुलभूषण एवं देशभूषण मुनिवरों की मोक्षस्थली है। कुलभूषण देशभूषण भगवान का प्रमुख मंदिर तलहटी से 250 सीढियाँ चढकर 175 फुट ऊँची पहाड़ी पर है। मंदिर में कुलभूषण देशभूषण मुनिवर के भूगर्भ …
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